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Views From The Left | उन फरिश्तों के आड़ में।
कर गए थे सब कुछ जो फरिश्तों के आड़ में, तबाह हो गई थी बहुत कुछ जो बिखरे रिश्तों की बाड़ में, है तो ये बस सबक इस बरसती हुई संसार का जहां बदलते हैं मौसम पतझड़ के प्रचार का तो क्या रखा है बोलो उन भूली…