samachar24x7.com
सिया के राम
पुरूष वस्तुतः अपूर्ण होता है और जीवन भर उस स्पर्श, भावना और प्रेम को ढूंढता फिरता है जो उसने भ्रूण अवस्था से अपनी माँ में महसूस किया था। जब उसे ऐसी स्त्री मिल जाती है, उसकी पूर्णता की यह खोज भी पूर्ण...
देवेन्द्र सिकरवार