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आपका व्यवहार और जीवन दृष्टि - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
लेखक- तरूण विजय बहुत आसान है वेद, पुराण, मनुस्मृति और अन्य शास्त्रीय ग्रंथ उठाकर सामने रखना और कहना कि इनमें कहीं भी अस्पृश्यता को मान्य नहीं किया गया है