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दर्दो को कागजो पर लिखता रहा - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
जिन्दगी के दर्दो को,कागजो पर लिखता रहा मै बेचैन था इसलिए सारी रात जगता रहा जिन्दगी के दर्दो को,सबसे छिपाता रहा कोई पढ़ न ले,लिख कर मिटाता रहा मेरे दामन