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कहाँ जाने का समय है आया ! - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
(मधुगीति १८०८०१ अ) कहाँ जाने का समय है आया, कहाँ संस्कार भोग हो पाया; सृष्टि में रहना कहाँ है आया, कहाँ सृष्टि से योग हो पाया !