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कर के वे प्रगति अग्रगति आत्म कब लिये ! - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
कर के वे प्रगति अग्रगति, आत्म कब लिये; उर लोक की कला के दर्श, कहाँ हैं किये ! वे अग्रबुद्ध्या मन की झलक, पलक कब रचे; नेत्रों से मन्त्र छिड़के कहाँ,