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हम स्वयं ही तो कर रहे हैं हिंदी की हिंदी - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
तेजवानी गिरधर शीर्षक पढ़ कर ही आप समझ गए होंगे कि हमने हिंदी भाषा की हालत क्या कर दी है। शीर्षक में दूसरी बार आया हिंदी शब्द उपमेय है, जिसे आजकल बोलचाल की