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धेनु चरन न तृणउ पात ! - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
धेनु चरन न तृणउ पात, त्रास अति रहत; राजा न राज करउ पात, दुष्ट द्रुत फिरत ! बहु कष्ट पात लोक, त्रिलोकी कूँ हैं वे तकत;