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आज फिर बेटी लूटी है मौत ने उसको छुआ, - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
कुलदीप विद्यार्थी 4.गज़ल आज फिर बेटी लूटी है मौत ने उसको छुआ, मुल्क मेरा हो चला जैसे कि, अपराधी कुँआ, जाति के झगड़े कहीं तो हैं कहीं दंगे यहाँ, मुस्कुराते