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       फाकाकशी और मस्ती के वे दिन - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
विजय कुमार, यह बात अटल जी के राजनीति में आने से पहले की है। उन दिनों लखनऊ से मासिक राष्ट्रधर्म, साप्ताहिक पांचजन्य, दैनिक स्वदेश और सांयकालीन तरुण भारत भी