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ये कहा आ गये हम.....लडते लडते......... - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
शादाब ज़फ़र शादाब यह कैसा देश और समाज बना दिया है हमने,जहाँ हम हिंदू हैं या मुसलमान!या तो देशभक्त हैं या देशद्रोही!हमारी पीड़ाएँ तक बाँट दी गई हैं।आठ साल