pravakta.com
मेरी आँखों के सामने अब कोई अँधेरा नही, - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
लेखक : बबली सिंह मेरी आँखों के सामने अब कोई अँधेरा नही, कि हर धूल मैंने झाड़ दी है अब, मुझे अब अपने दर्द की नुमाइश भी नही करनी, कि हर मर्ज़ की दवा