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कमी है परवरिश में इसलिए मनद्वार ऐसे हैं, - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
कमी है परवरिश में इसलिए मनद्वार ऐसे हैं, नई कलियाँ मसलते हैं, कई किरदार ऐसे हैं। नहीं जलते वहाँ चूल्हे, यहाँ पकवान हैं ताजा, हमारी भी सियासत के नए हथियार