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'फिर जुल्फ लहराए' - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
'फिर जुल्फ लहराए' फिजा ठंडी हैं कुछ पल बाद ये माहौल गरमाए। कहीं चालाकियाँ ये इश्क में भारी न पड़ जाए। ज़रा सी गुफ्तगू कर लें, बड़े दिन बाद लौटे हो, नज़ाकत