pravakta.com
है नाट्यशाला विश्व यह ! - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
है नाट्यशाला विश्व यह, अभिनय अनेकों चल रहे; हैं जीव कितने पल रहे, औ मंच कितने सज रहे ! रंग रूप मन कितने विलग, नाटक जुटे खट-पट किए; पट बदलते नट नाचते, रुख़