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खोया है गाँव मेरा ! - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
डॉ. मधुसूदन (१) सीढीपर बैठा बालवृन्द, मस्ती से,आवाजाही निरखता हो. बरखा की शीतल खुशी, हथेली पर झेलता हो. ---मिल जाएँ ऐसा गाँव, तो लौटाना ना भूलना, मेरा