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सुलगी हुई घाटी की नई आफत - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' दिन ढलने को था, आसमान से श्वेत कबुतर अपने आशियानों की तरफ लौटने ही वाले थे, कहवा ठण्डा होने जा रहा था, पत्थरबाजों के हौसले परवान पर