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          लोकतांत्रिक मूल्यों की सरकार ही देश समाज से डरती है - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
प्रवीण गुणगानी एक प्रसिद्द शेर याद आया - गिरते हैं शह सवार ही मैदाने जंग में ,वो तिफ्ल (सैनिक) क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल गिरें मेरी ही नहीं अपितु