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प्रकृति की अव्यवस्था पर एक नज़र - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
पृथ्वी पर कोई भी जीव एकल जीवन व्यतीत नहीं कर सकता है इसलिए मानव और प्रकृति की परस्पर आत्मनिर्भरता एवं सद्भावनाओं को समाप्त करने से हमारा पारिस्थितिकी