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आए रहे थे कोई यहाँ ! - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
(मधुगीति १८०७०३ स) आए रहे थे कोई यहाँ, पथिक अजाने; गाए रहे थे वे ही जहान, अजब तराने ! बूझे थे कुछ न समझे, भाव उनके जो रहे;