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आपस के रिश्ते जब से व्यापार हुए - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
कुलदीप विद्यार्थी आपस के रिश्ते जब से व्यापार हुए। बन्द सभी आशा वाले दरबार हुए। जिसको इज्ज़त बख्सी सिर का ताज कहा उनसे ही हम जिल्लत के हकदार हुए। मंदिर,