pravakta.com
शबनमी आेश के कण - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
राकेश कुमार सिंह शबनमी ओश के कण मोती सदृस्य बिखरे हुये, कोमलता पारदर्शी, मुखड़ा तुम्हारा याद आया ! शीतल मंद वायु का झोका, मौसम अठखेलियाँ करता हुआ, गुंजार