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सात फेरे - आठ वचन - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
-कुलदीप प्रजापति- बांध रही हूँ जीवन को रिश्तो के पक्के धागों से, प्रियतम वचन निभाना अपने मुकर न जाना वादों से, अंजुरी से अंजुरी थाम कर फेरा प्रथम मैं लेती