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व्यंग्य कविता ; काम वालियां - प्रभुदयाल श्रीवास्तव - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
काम वालियां नहीं कामपर बर्तन वाली दो दिन से आई इसी बात पर पति देव पर‌ पत्नि चिल्लाई काम वालियां कभी समय पर अब न आ पातीं न ही ना आने का कारण‌ खुलकर बतलातीं