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वर्षा !-बीनू भटनागर - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
वर्षा ! वर्षा ! तुमसे करूँ विनती एक, रुक ना जाना एक जगह पर, सबको प्यार बराबर देना। वर्षा ! इतना जल भी ना दे देना जो, घर घरोंदे,गाँव गली, चौबारे, खेत किसान