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साधना - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
आज मेरी साधना के फूल धरती पर खिले हैं। ये न मुरझायें कभी ये न कुम्हलायें कभी, इनके साथ, मेरे सभी सपने जुड़े हैं। मोती जो बिखरे हुए हैं, इनसे मै माला