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कविता / भ्रांति - Pravakta | प्रवक्‍ता.कॉम : Online Hindi News & Views Portal of India
चीखो, चिल्लाओ, नारा लगाओ। सुनता हमारी कौन है? (सारे बोलने में व्यस्त है।) इसी के अभ्यस्त है। लिखो लिखो झूठा इतिहास। हमारा भी नहीं विश्‍वास। पढ़ता उसे कौन ह