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काव्यपाठ और राजनीति - दीपक चौरसिया 'मशाल' - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
" ऐसी रचनाएँ तो सालों में, हजारों रचनाओं में से एक निकल के आती है. मेरी तो आँख भर आई" "ये ऐसी वैसी नहीं बल्कि आपको सुभद्रा कुमारी चौहान और महादेवी वर्मा जी की श्रेणी में पहुँचाने वाली कृति है"