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भव्य भव की गुहा में खेला किए ! - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
गोपाल बघेल ‘मधु’ भव्य भव की गुहा में खेला किए, दिव्य संदेश सतत पाया किए; व्याप्ति विस्तार हृदय देखा किए, तृप्ति की तरंगों में विभु भाए ! शरीर मन के