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‘पशुधन’ नहीं, ‘धनपशु’ हैं आवारा - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
अर्पण जैन 'अविचल' शहर में ट्राफ़िक सिग्नल के सामने, अस्पताल में लगे नीम के पेड़ के नीचे, रास्ते के किनारे, कचहरी के खुले बरामदे में, चौराहों के बीचों-बीच,