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दर्द भी दिया अपनों ने - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
डॉ. रूपेश जैन 'राहत' भी दिया अपनों ने उम्मीद भी अपनों से जाएँ कहा बिना उनके अपने तो अपने होते हैं। वो दूर चले गए कितने या हम पास न रह पाए