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इतनी बेरूखी कभी अच्छी नहीं - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
इतनी बेरूखी कभी अच्छी नहीं ज्यादा दीवानगी भी अच्छी नहीं। फासला जरूरी चाहिए बीच में इतनी दिल्लगी भी अच्छी नहीं। मेहमान नवाजी अच्छी लगती है सदा बेत्क्लुफ्फी