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संस्मरण- झलकियों में - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
गंगानन्द झा तब हम पाँच-छः साल के रहे होंगे। पिता के साथ मैं दुमका गया था।. दिन के भोजन के समय मैंने उससे पूछा कि वह किस क्लास में पढ़ता है। उसने कहा, --