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पत्रकारिता के पुरोधा : विद्यार्थी जी - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
''जो कलम सरीखे टूट गये पर झुके नहीं, उनके आगे यह दुनिया शीश झुकाती है जो कलम किसी कीमत पर बेची नहीं गई, वह तो मशाल की तरह उठाई जाती है'' राष्ट्रवादी