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मैं देवदार का घना जंगल - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
अरुण तिवारी मैं देवदार का घना जंगल, गंगोत्री के द्वार ठाड़ा, शिवजटा सा गुंथा निर्मल गंग की इक धार देकर, धरा को श्रृंगार देकर, जय बोलता उत्तरांचल की, चाहता