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प्रेम, दाढी और धडकनें - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
आज रास्ते में रमेश मिला था. चेहरे पर चार इंच की उगी झाड़ियों में से झांकते चेहरे को मैं नहीं पहचान पाया किन्तु मेरा उन्नत ललाट उसकी समझ से