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सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविंद ना आयेंगे.... - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
देवेंद्रराज सुथार छोड़ो मेहंदी खडक संभालो, खुद ही अपना चीर बचा लो, द्यूत बिछाये बैठे शकुनि, मस्तक सब बिक जायेंगे, सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविंद ना