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प्रकाश धरा आ नज़र आता - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
गोपाल बघेल ‘मधु’ प्रकाश धरा आ नज़र आता, अंधेरा छाया आसमान होता; रात्रि में चमकता शहर होता, धीर आकाश कुछ है कब कहता ! गहरा गहमा प्रचुर गगन होता,