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भाषा और समाज - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
-गंगानंद झा- बात सन् 1989 की है, 'बाबरी मस्जिद-राम मन्दिर' का हंगामा चल रहा था, तभी कुछ दोस्तों ने शहर की दीवालों पर जगह-जगह चिपके बहुत सारे पोस्टर्स की