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गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-26 - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
राकेश कुमार आर्य गीता का चौथा अध्याय और विश्व समाज चिन्तन वही ऊंचा और पवित्र होता है-जिसमें 'ऋत' और 'सत्य' की साधना की जाती है। भारत के महान पूर्वजों ने