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गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-67 - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
राकेश कुमार आर्य    गीता का बारहवां अध्याय और विश्व समाज यह जो अव्यक्त है ना, इसके ओर-छोर का पता तो प्रकाश की गति से दौडक़र भी नहंी लगाया जा सकता।