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गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-62 - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
राकेश कुमार आर्य   गीता का दसवां अध्याय और विश्व समाज ''तुझे पर्वतों में खोजा तो लिये पताका खड़ा था। तुझे सागर मेें खोजा तो मां के चरणों में पड़ा