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गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-58 - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
राकेश कुमार आर्य   गीता का दसवां अध्याय और विश्व समाज ''पत्ते-पत्ते की कतरन न्यारी तेरे हाथ कतरनी कहीं नहीं-'' कवि ने जब ये पंक्तियां लिखी होंगी तो