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गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-56 - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
राकेश कुमार आर्य   गीता का नौवां अध्याय और विश्व समाज इस प्रकार ईश्वर को एक देशीय न मानना स्वयं अपने बौद्घिक विकास के लिए भी आवश्यक है। आज का मनुष्य