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गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-43 - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
गीता का छठा अध्याय और विश्व समाज योगेश्वर श्री कृष्णजी कहते हैं कि अर्जुन यह कार्य अर्थात मन को जीतना या वश में करना अभ्यास तथा वैराग्य के माध्यम से सम्भव