pravakta.com
कनिष्क कश्यप : अक्श बिखरा पड़ा है आईने में - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
अक्श बिखरा पड़ा है आईने में मैं जुड़ने कि आस लिए फिरता हूँ कदम तलाशते कुछ जमीं हाथों पर आकाश लिए फिरता हूँ कठोर हकीक़त है है मेरा आज कल खोया विस्वास लिए