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कनिष्क : खाने को दाना नहीं शौचालय बनाना है। - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
अपने देश का दुर्भाग्य है,हम हर चीज पहले हीं देख लेते हैं और हजारों साल ढोने के बाद भी उसे पुरी तरह आत्मसात नहीं कर पाते। आप इस कथ्य का द्र्श्टांत देखें तो