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‘‘कह रहीम कैसे निभै, केर-बेर को संग’’ - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
जहां तक गठबंधन धर्म का सवाल है तो यह लालू यादव की अहम जिम्मेदारी थी कि ऐसी स्थिति में तेजस्वी का मंत्रिमण्डल से इस्तीफा दिलवाकर गठबंधन धर्म का निर्वहन करते, पर लालू यादव पुत्र मोह में धृतराष्ट्र के अवतार साबित हुए। वस्तुतः लालू यादव जैसे लोगों के पास न तो कोई नीति है और न सिद्धांत। उनका एकमात्र सिद्धांत सत्ता और उसका निर्बाध भोग है। ठीक जैसे राहुल गांधी के चलते कांग्रेस पार्टी भले रसातल में चली जाए, पर राहुल को किनारे नहीं किया जा सकता।