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जन नहीं बदलेगा तो तंत्र कैसे बदलेगा - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
इक़बाल हिंदुस्तानी संविधान समाज को रास्ता ही दिखा सकता है चला नहीं सकता ! गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस अब देश में रस्म अदायगी जैसे बनकर रह गये हैं।