pravakta.com
जादूगरी जो जानते - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
-गोपाल बघेल 'मधु'- (मधुगीति १५०५२६-५) जादूगरी जो जानते, स्मित नयन बस ताकते; जग की हक़ीक़त जानते, बिन बोलते से डोलते। सब कर्म अपने कर रहे, जादू किए जैसे